Geeta thakur

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आजादी के 75 साल




🇮🇳 🙏🌺 इस साल भारत 15 अगस्त 2022 को अपनी आजादी के 75 साल पूरे करने जा रहा है। इस उपलक्ष में देश में जोर शोर से आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इतिहास गवाह है कि भारतवासी उन वीर शहीदों की कुर्बानियों को नहीं भूले जिन्होंने आजादी दिलाने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे उनके कहे हर एक शब्द में सभी में आजादी का जीवन भर दिया था आइए आज उन वीरों की कुर्बानियों की आजादी के नारों के जरिए उन्हें याद किया जाए।
१नेताजी सुभाष चंद्र बोसनारा**भारत को आजादी दिलाने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर 1943को आजाद हिंद फौज की स्थापना की"साल १९४४ पहली बार नेता जी ने बर्मा में भारतीयों के समक्ष दिए गए भाषण में इस नारे को"तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा"।
२राम प्रसाद बिस्मिलसरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, उन्होंने साल 1921 में सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है, इस नाम से एक नज्म लिखी थी, अदालत में अपने साथियों के साथ नारे के रूप में गाकर इसी लोकप्रिय बनाया।
३शहीद भगत सिंहएक उर्दू शायर मौलाना हसरत मोहनी ने साल 1921 में इंकलाब जिंदाबाद का नारा दिया था। 8 April 1929 को भरी असेंबली में बम फोड़ कर अपनी बुलंद आवाज में इस नारे को लोकप्रिय बनाया।
४युसूफ मेहर अलीआजादी की लड़ाई में"अंग्रेजों भारत छोड़ो"का नारा दिया और 1942 में इस नारे का प्रस्ताव रखा।
५चंद्रशेखर आजाददुश्मनों की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे आजाद ही रहेंगे, का नारा बुलंद आवाज कहा।
६करो या मरोराष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस नारे को शुरू किया।
७मोहम्मद अल्लाम इकबालसारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा, यह कोई नारा नहीं बल्कि उर्दू भाषा में लिखी हुई एक देश प्रेमी गजल थी. 1905 में लिखा और लाहौर के एक कालेज भी पढ़ कर सुनाया इसके बाद देशभर में इस गाने के नारे और ग़ज़ल का रूप गाया जाने लगा।
८पंडित मदन मोहन मालवीय"सत्यमेव जयते"यह आज के भारत का एक आदर्श है. 1918 को नारे के रूप में सत्यमेव जयते का नारा दिया. कई सो वर्ष पहले लिखे गए उपनिषद*मुण्डक "का सर्व ज्ञात मंत्र ३.१.६**सत्य की हमेशा विजय होती है।
९**युसूफ मेहर अली""साइमन वापस जाओ"3 फरवरी 1928 को जब पानी की जहाज से साइमन कमीशन सदस्य उतरे थे उसी समय साइमन गो बैक का नारा लगाना शुरू किया।
१०बाल गंगाधर तिलक""स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा""यह मूल रूप से मराठी में नारा दिया गया था. आप भारत के प्रमुख नेता समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी भी रहे जिसे लोकमान्य तिलक के नाम से भी जाना जाता है।
इन सभी स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान की बाजी देश को आजाद कराने में न्योछावर कर दी, युगो युगो तक देश इन्हें याद करता रहेगा। जय हिन्द, वंदे मातरम

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गीता ठाकुर दिल्ली से 🙏🙏🇮🇳

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8 Comments

Punam verma

11-Oct-2022 08:03 PM

Nice

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Wahhh बहुत ही ऐतिहासिक जानकारी देता हुआ लेख

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